Mandiron me pooja

 मंदिरों में पूजा के बाद उसकी परिक्रमा का वैज्ञानिक महत्व एवं उसकी वैज्ञानिकता क्या है....?


पूर्ण रूप से एक वैज्ञानिक धर्म होने के कारण हमारे सनातन धर्म के एक-एक गतिविधि का ठोस वैज्ञानिक आधार है...

और चूँकि हर एक सामान्य व्यक्ति को उच्च वैज्ञानिक कारण समझ में आये ऐसा आवश्यक और संभव नहीं हो पाता इसीलिए हमारे ऋषि-मुनियों ने उसे रीति-रिवाजों का रूप दे दिया जो आज भी बड़ों के आदेश के रूप में निभाये जाते है.

दरअसल....

वैदिक पद्धति के अनुसार मंदिर वहां बनाना चाहिए जहां से पृथ्वी की चुम्बकीय तरंगे घनी हो कर जाती है। और इन मंदिरों में गर्भ गृह में देवताओं की मूर्ति ऐसी जगह पर स्थापित की जाती है.

मूर्ति के नीचे ताम्बे के पात्र रखे जाते है जो यह तरंगे अवशोषित करते है.

इस प्रकार जो व्यक्ति रोज़ मंदिर जा कर इस मूर्ति की घडी के चलने की दिशा में परिक्रमा ( प्रदक्षिणा ) करता है.वह इस एनर्जी को अवशोषित कर लेता है.

यह एक धीमी प्रक्रिया है और नियमित ऐसा करने से व्यक्ति की सकारात्मक शक्ति का विकास होता है. इसीलिए हमारे मंदिरों को तीन तरफ से बंद बनाया जाता है जिससे इस ऊर्जा का असर बढ़ जाता है.

साथ ही मूर्ति के सामने प्रज्वलित दीप उष्मा की ऊर्जा का वितरण करता है.एवं, घंटियों की ध्वनि तथा लगातार  होते रहने वाले मंत्रोच्चार से एक ब्रह्माण्डीय नाद बनती है जो, ध्यान केन्द्रित करती है.

यही कारण है कि तीर्थ जल मंत्रोच्चार से उपचारित होता है. चुम्बकीय ऊर्जा के घनत्व वाले स्थान में स्थित ताम्रपत्र को स्पर्श करता है और यह तुलसी कपूर मिश्रित होता है. इस प्रकार यह दिव्य औषधि बन जाता है...!

मंदिर में जाते समय वस्त्र यानी सिर्फ रेशमी पहनने का चलन इसी से शुरू हुआ क्योंकि, ये उस ऊर्जा के अवशोषण में सहायक होते है.


इसी कारण यह कहा जाता है कि मंदिर जाते समय महिलाओं को गहने पहनने चाहिए क्योंकि धातु के बने ये गहने ऊर्जा अवशोषित कर उस स्थान और चक्र को पहुंचाते है जैसे गले ,कलाई , सिर आदि .

और.इसीलिए, हमारे हिन्दू सनातन धर्म में नए गहनों और वस्तुओं को भी मंदिर की मूर्ति  के चरणों से स्पर्श कराकर फिर उपयोग में लाने का रिवाज है ....!

इसीलिए हमें आज एक बार फिर से खुद को पहचानने एवं अपने वैज्ञानिकता से भरे रीति-रिवाजों को समझने की जरूरत है कि आखिर, हमारे विद्वान ऋषि मुनियों ने ऐसी परम्पराएं क्यों बनाई थी ?

टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुन्दर... दार्शनिक और वैज्ञानिक जानकारी से हमारी संस्कृति को समझने में सरलता हुई.
    आपको बहुत बहुत धन्यवाद . 🌹🙏



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