कानन पेंडारी जू की 21 नीलगाय को छोड़ा जाएगा गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान
बिलासपुर। कानन पेंडारी की 21 नीलगाय को कोरिया जिले के गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा जाएगा। इसके लिए केंद्रीय चिडिय़ाघर प्राधिकरण से पहले ही अनुमति मिल गई है। अब जू प्रबंधन शिफ्टिंग की योजना तैयार करने में है। नीलगाय को वाहन में लाने के लिए पहले जिबाब्वे में खोज की गई बोमा तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसमें दिक्कत आती है तब ट्रैंक्यूलाइजर गन से उन्हें बेहोश किया जाएगा।
कानन पेंडारी में वन्य प्राणियों की संख्या निर्धारित है। इतने ही वन्य प्राणियों को रखने की अनुमति है। संख्या अधिक होने पर शिफ्टिंग का प्रविधान है। अभी कानन जू में 33 नीलगाय हैं। जबकि जू प्रबंधन केवल 12 नील गाय को ही रखना चाह रहा है। इसलिए 21 नील गाय की शिफ्टिंग की योजना बनाई गई और इसका प्रस्ताव बनाकर केंद्रीय चिडिय़ाघर प्राधिकरण को भेजा गया। प्रस्ताव भेजने के बाद प्राधिकरण से हरी झंडी का इंतजार था। अब स्वीकृति मिल गई है। जू प्रबंधन ने अभी से शिफ्टिंग की योजना बनानी शुरू कर दी है।
बेहोश के साथ ही होश में लाने की दी जाएगी दवा
जू प्रबंधन चीतलों की तरह नीलगाय को बोमा तकनीक से शिफ्ट करेगा। यह बेहद सफल तकनीक है। जू से लगातार चीतलों की शिफ्टिंग इसी पद्धति से हो रही है। यह तकनीक सफल नहीं होती है या किसी तरह जोखिम दिखाई देगा तो तत्काल इसे बंद कर बेहोश करने वाली तकनीक अपनाई जाएगी। इसमें बेहोश करने के साथ होश में लाने की दवा भी दी जाएगी।
65 चीतलों को एटीआर में छोड़ेगे, मांगी अनुमति
नीलगाय के साथ-साथ 65 चीतलों को अचानकमार टाइगर रिजर्व में छोडऩा है। इसके लिए प्राधिकरण से अनुमति मांगी गई है। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद टाइगर रिजर्व में जो चीतलों के लिए अलग से बाड़ा बनाया गया है, वहां छोड़ा जाएगा। इस महीने के अंत तक प्राधिकरण से अनुमति मिलने की संभावना अफसर जता रहे है। वर्ममान में कानन में अधिक संख्या में चीतल मौजूद है।
शिफ्टिंग अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में की जाएगी। शिफ्टिंग के लिए दो वाहनों का उपयोग किया जाएगा। एक वाहन जंगल सफारी से मंगाया जाएगा।
- विष्णु नायर, डीएफओ कानन पेंडारी

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